Yaar Jadugar Book in Hindi

Review and Summary of Yaar jadugar Book in Hindi by Nilotpal Mrinal pdf download

Review and Summary of Yaar Jadugar Book in Hindi by Nilotpal Mrinal pdf download . काफी दिनों के इंतजार के बाद मृणाल ने अपनी कलम से एक और रचना को बहाल किया है। जिसका इंतजार उन सभी पाठकों को था। जिनसे निलोत्पल रूबरू हो चुके हैं।

Review of Yaar jadugar Book in Hindi

“मृत्यु एक सरल रेखा है, जीवन घुमावदार रास्ता। मृत्यु एक सुलझा हुआ धागा है पर जीवन उलझे हुए धागों का समूह, जिसे कोई चमत्कार नहीं सुलझा सकता।”

नीलोत्पल ने इस वाक्य को समझाने के लिए पूरी किताब को लिख दिया। जिसकी घटना और उनमे सामील पात्र बहुत ही रोचक हैं। पात्रों के बीच व्यंगात्मक संवाद, आधुकीन भारत के कुछ नाजुक हालत पर बड़े प्रेम से तंज कस रहा है। नीलोत्पल की यह तीसरी किताब है। किताब मिस्ट्री और जिज्ञासा से भरपूर है। जिसे हर पल जानने की इच्छा बरकरार रहती है। मृणाल के इस किताब का इंतजार काफी ज्यादे दिनों से था।Yaar jadugar Book in Hindi

“औघण” और “यार जादूगर” दोनों पढ़ने के बाद ऐसा लगता है कि समाज को देखने का नजारिया निलोत्पल का बहुत बारीक और गहन है। आज के समय का इतना गंभीर, सरल और सुधा हुआ रचना जानना और देखना बहुत कमतर ही है। या यूं कहे तो यही एक।

मृणाल की कलम, मुझे नहीं लगता लिखने से पहले खुद उनके बताए रास्ते पर चल कर ऐसा करती है या मृणाल ने अब किसी बगीचे की बागबानी करना शुरू कर दिया है। अब जो भी हो। बागवानी मे लगे फूल अच्छे हैं। जो सबसे अच्छा फूल है, उसे मृणाल ने दरवाजे पर यानि इस किताब के पहले पन्ने पर ही लगा रखा हई, जिसे आपको देखने को मिल जाएगा। सुघने मात्र से आप अपने को पूरा बागवानी घूमने के मजबूर हो जाएंगे। तो चलिए सूँघिए और आनंद लीजिए।Yaar jadugar Book in Hindi

Summary of Yaar jadugar Book in Hindi

भोलवा पहाड़ी की तलछट से थोड़ी दूर हटकर मैदान में बसा एक मझोला-सा गावं है,दामुसिंघा। गावं से उत्तर मे हैं बास्को का जंगल। जहां डेनियल की कोठी है। लोग डरते हैं। यहाँ आने से। क्योंकि इस जर्जर कोठी मे एक अंग्रेज का भूत रहता है, जो कई साल पहले इस कोठी मे रखे अनाज का इनचार्ज हुआ करता था। गाव के लोगों का मामना है कि डेनियल अभी भी वही रहता है, और जो रात को कभी उधर जाता है, वो कभी वापस लौट कर नहीं आता।Yaar jadugar Book in Hindi

दामुसिंघा गावं के जमींदार अवध नारायण सिंह उनकी पत्नी कौशल्या देवी अपने 35 साल के बेटे जयप्रकाश की सेवा करने मे लगे हैं। क्योंकि जयप्रकाश एक नवजात शिशु की तरह हरकत करता है। पूरा दिन बिस्तर पर लेटा रहता है, छोटे बच्चे की तरह हाथ-पाँव चलाता है। मुख से हमेशा लार निकलता रहता है। कभी-2 तो बेड पर टट्टी भी कर देता है लेकिन अवध नारायण सिंह और कौशल्या देवी को किसी से कोई शिकायत नहीं है।। बल्कि वो तो भगवान को इसके लिए कृतज्ञ जताते हैं।Yaar jadugar Book in Hindi

हा कभी-2 कौशल्या देवी जयप्रकाश की अकेले सेवा करने मे थक जाती है। कौशल्या देवी के कहने पर अवध नारायण सिंह अपने खेत मे काम करने वाले हरवाहे फुलचंद पासी को घर बुलाते हैं। फुलचंद पासी जब कमरे मे पड़े जयप्रकाश को देखता है तो बिल्कुल डर जाता है। और भागते हुए हॉल मे चला आता है। अवध नारायण सिंह फुलचंद को बहुत समझाते हैं। फुलचंद कहता है कि जयप्रकाश बाबू तो मर चुके थे, बल्कि हमसब ने ही तो कर्म-क्रिया किया था। फिर कैसे…  Yaar jadugar Book in Hindi

अवध नारायण सिंह फुलचंद को डेनियल की कोठी के बारे मे बताते हैं कि जिसने दोबारा जयप्रकाश को जीवित किया है। लेकिन उसने बहुत ढेर सारा पैसा भी लिया है। अब तुम्हें किसी से कहना नहीं है और तुम्हें प्रतिदिन जयप्रकाश की देख-रेख करनी है। जिसके बदले तुम्हें पैसा दिया जाएगा। फुलचंद इस बात को स्वीकार कर लेता है और अगले दिन से प्रीतिदीन जयप्रकाश की सेवा मे लग जाता है ।Yaar jadugar Book in Hindi

फुलचंद का दोस्त सुंदर, जो एक दुकान चलाता है। काफी दिनों से फुलचंद के दिखाई नहीं देने पर पूछता है।  फुलचंद बताना तो चाहता है लेकिन कुछ भी बताने से नकार देता है। गावं का चौकीदार भागवत हाजरा डेनियल की कोठी के बारे मे कुछ बात कहता है। जो फुलचंद जानता है। तभी किसी तरह अपने-आपको रोकते हुए फुलचंद वहाँ से चला जाता है। बात धीरे-2 एक-दूसरे के कानों से होते हुए दारोगा जोगी सिंह के कानों तक पहुचती है।Yaar jadugar Book in Hindi

दारोगा जोगी सिंह चौकीदार हाजरा को थाने मे तलब करते हैं। हाजरा कुछ भी कहने से मना करता है और कहता है कि सारे लोग लगभग जान चुके हैं। हालाकि लोगों की गलतफहमियों को दूर करने के लिए उन्हे जल्द से जल्द उस कोठी मे छापा डालना चाहिए। दारोगा भी उस समय जाने से टाल देता है लेकिन अचानक एक दिन बाद दारोगा अपने कुछ सिपाही और चौकीदार हाजरा को लेकर दिन के समय उस कोठी को पहुचता है, जहां कुछ भी नहीं होता। और सब लौट आते हैं।Yaar jadugar Book in Hindi         

कुछ दिन बाद जयप्रकाश की तबीयत खराब होने पर नारायण सिंह और कौशल्या देवी दोनों घबरा जाते हैं। लेकिन उसे लेकर कही जा ही सकते, ताकि लोगों को जयप्रकाश के बारे मे पता चले।  नारायण सिंह एक अननोन नंबर पर कॉल कर जल्दी से डॉक्टर भेजने के लिए याचिका करते है और कुछ ही देर बाद डॉक्टर आ जाता है। सुई-दवाई देने के बाद डॉक्टर अपना एक मोटी फीस माँगता है और नारायण सिंह के जवाब –सवाल करने पर कहता है कि वो सब जानता है। जिसकी दवा बहुत महंगी होती है। और एक वही है जो जानता है। जिससे मजबूर होकर नारायण सिंह को देना पड़ता है। कौशल्या देवी अपने बच्चे की इस हालत से दुखी और परेशान होकर नारायण सिंह को उस आदमी से मिलने को कहती है, जिसने जयप्रकाश को उस कोठी से जिंदा लाने मे मदद की थी।Yaar jadugar Book in Hindi

 एक दिन रात के समय दारोगा जोगी सिंह डेनियल की कोठी को पहुचता है और वहाँ उपस्थित उस सिद्ध आदमी से मिलता है, जो मरे हुए लोगों को जीवित कर देता है। दारोगा ही उन सभी जीवित करने वाले लोगों का माध्यम होता है। उस बूढ़ा आदमी से मिलने पर दारोगा कहता है कि अब बात धीरे-2 बहुत दूर तक पहुच चुकी है। मीडिया और उसके ऊपर के अधिकारी भी अब बहुत दबाव दे रहे हैं। उसने आजतक बूढ़े बाबा को सुरक्षित रखा। जिसके बदले उन्होंने बहुत ढेर सारा पैसा भी कमाया। दारोगा चाहता है कि बूढ़ा सिद्ध पुरुष ऐसे चार सिपाहियों को जीवित कर दे, जो सिर्फ और सिर्फ उसकी सुने। बूढ़ा मान जाता है और कहता है कि उसे मरे हुए लोगों को एक फोटो और उन सभी लोगों के परिवार से लिखा हुआ एक नोटिस देगा तो वो जीवित कर सकता है।Yaar jadugar Book in Hindi

दारोगा अपने थाने से के रिकार्ड बुक से मरे हुए चार सिपाहियों के फ़ोटो लेकर उनके परिवार वालों को बीमा के पैसे की लालच देकर एक कागज पर साइन करा लेता है और बाबा को लाकर देता है। बाबा उन सभी चारों सिपाहियों को मिट्टी से बनाने के बाद अपने सुनहरे हथोड़े से ठोक कर प्राण फुक देता है। जिसे लेकर दारोगा अपने घर चला जाता है। उन सभी की हालत नवजात शिशु की तरह होती है। और चौकीदार हाजरा को उन सभी के रखवाली के लिए पैसे के बदौलत रख लेता है।Yaar jadugar Book in Hindi

फुलचंद धीरे-2 उस कोठी का माजरा जानने के बाद अवध नारायण सिंह के यहाँ से पैसों और गहनों की चोरी कर अपने मरे हुए बच्चे को जीवित करने के लिए जाता है, लेकिन अपने बच्चे का फ़ोटो नहीं होने पर उसे बड़ी निराशा लगती है और फिर वो पैसा को किसी बहाने लोटा देता है।Yaar jadugar Book in Hindi

चौकीदार के ही कहने पर दूसरे गावं के हरिहर बाबू उस कोठी का पता लगाते हुए बाबा के पास पहुचते हैं। दारोगा के बीच मे पड़ने से पैसा ज़्यादा लगने पर अकेले ही जाना ठीक समझते हैं। हरिहर बाबू जब उस सिद्ध पुरुष बुड्ढे आदमी से मिलते हैं तों बिल्कुल डर जाते हैं। बूढ़ा आदमी उन्हे दिलासा देता है और शांत होने को कहता है। हरिहर बाबू कहते हैं कि वो अपनी पत्नी को जीवित करना चाहते हैं। जिसे सुन कर बूढ़ा आदमी भी खुश होता है कि उसके पास पहली बार कोई महिला को जीवित कराने आया। बूढ़ा आदमी स्वीकार कर लेता है। हरिहर बाबू जब अपने घर पर बाल–बहुओं से सलाह लेते हैं तो वो भी स्वीकार कर लेते हैं लेकिन पिठ पीछे ये कहा जाता है कि उस बूढ़ी महिला को जीवित कराने से कोई फायदा नहीं होगा बल्कि उन्हे परेशानी होंगी। हा ये ठीक रहेगा कि बुड्ढे के मरने के बाद उसे जीवित कर लिया जाएगा, क्योंकि उसकी पेंशन आती रहेगी तो उसका सेवा भी होता रहेगा। ये बात जानने के बाद हरिहर बाबू अपने सारा पैसा लेकर रात के समय डेनियल की कोठी पहुचते है और उस सिद्ध पुरुष से कहते हैं कि ये सारा पैसा रख लीजिए और जब मेरे मरने के बाद मेरे बेटे आपको मुझे जीवित करने को बोले तो आप ऐसा नहीं करिएगा। ये बात उस सिद्ध पुरुष को बहुत आश्चर्य मे डाल देती है और वो उसकी बात को मानते हुए पैसा को भी लौटा देता है।Yaar jadugar Book in Hindi

उस सिद्ध पुरुष द्वारा दोबारा जीवित किये गए किसी भी इंसान की हालत ठीक नहीं होने पर सारे लोग दारोगा से संपर्क करते हैं। बल्कि दारोगा तो खुद उन चार सिपाहियों को लेकर परेशान हो जाता है क्योंकि चौकीदार उनकी सेवा करने से मना कर देता है और कहता है कि चाहे वो उसको गोली मार दे पर अब वो एक और दिन नहीं रुकने वाला। दारोगा भी इससे परेशान होकर अपना माथा पीटने लगता है। तब चौकीदार ऐसे ही आदमियों को उस सिद्ध पुरुष बुड्ढे को वापस करने की सलाह देता है। जिसमे अवध नारायण बाबू भी शामिल होते हैं।Yaar jadugar Book in Hindi

सब लोग मिलकर अपने-2 जीवित पुरुष को लेकर डेनियल की कोठी पहुचते हैं जहां डेनियल मौजूद नहीं होता।उस कोठी के हॉल मे उन सभी जीवित आदमियों को रख कर लौट जाते हैं। सभी के जाने के बाद जब सिद्ध पुरुष हॉल मे लेटे हुए उन सभी जीवित मनुष्यों को ऐसे बेपरवाह देखता है तो बहुत दुखी होता है और ज़ोर से चिल्लाता है। तब उस रात कोठी मे एक भयंकर तूफान और भारी बारिश के बाद आसमान चीरकर एक नीला प्रकाश फैलने के बाद हॉल मे भैंसा पर बैठे हुए यमराज प्रकट होते हैं। तब पता चलता है कि सिद्ध पुरुष बुड्ढा नहीं बल्कि यमराज का लड़का (कतीला) और युधिष्ठिर का चचेरा भाई है। जो युधिष्ठिर की तरह अपनी भी ख्याति पाने के लिए यमलोक से भाग कर पृथ्वी पर आया और मरे हुए लोगों को जीवित करने लगा।Yaar jadugar Book in Hindi

यमराज कतीला को समझाते हैं कि वो इसलिए सफल नहीं हो सकता क्योंकि उसने प्रकृति के नियमों का अपमान किया है। उसे ऐसा नहीं करना चाहिए। भगवान ने सभी को अपने कर्मों के अनुसार उसका फल दिया है। वो विधि का विधान नहीं बदल सकता । कतीला इस बात को समझता है और सुबह होने से पहले अपने यमलोक को लौट जाता है। जब पुलिस, मीडिया और आजू-बाजू गावं के लोग पहुचते सबकुछ शांत हो चुका होता है। हॉल में पड़े जीवित प्राणी एक मिट्टी का ढेर बन चुके होते हैं। Yaar jadugar Book in Hindi    

कुछ अच्छे और महत्वपूर्ण अंश Yaar jadugar Book in Hindi

  • यूं तो मानव दासों के रूप मे सदियों से इंसान की खरीद-फरोख्त के लिए मंडियाँ सजाई, बाजार खोले। मेहनती गुलाम से लेकर आकर्षक दासियों तक का बिकना मनुष्यता के लिए कभी भी न आश्चर्य का विषय रहा न किसी शर्म और कौतूहल का। आदमी तो, आदमी के रूप में पैदा होने के दिन से लेकर आज तक बिकता ही रहा।Yaar jadugar Book in Hindi
  • शुरुआत के कुछ दिन तो फूलचंद कमरे मे दाखिल होता तो उसके पाँव कापते और शरीर मे झुनझुनी सी उठती। वो जयप्रकाश को जिंदा बिस्तर मे पड़ा देखकर लाख चाह कर भी सामान्य नहीं कर पा रहा था। कमरे मे घौसते ही उसके हृदय की गति कभी बढ़ जाती तो कभी अटकी सी लगती। फिर जब जयप्रकाश की माँ कौशल्या देवी आ जाती तब जाकर फूलचंद थोड़ी हिम्मत कर अपने काम मे लगता।Yaar jadugar Book in Hindi
  • फूलचंद के गर्म हो चुके दिमाग को अचानक ठंड का एहसास हुआ। उसने हसते हुए मेंटोस पकड़ा और मन-ही-मन बड़े साले का स्मरण कर कैंडी का रैपर फाड़ उसे मुँह मे फाँक गया। उसकी जीभ पर शीतलता की एक झोंक उतरी और सारे मुद्दे हवा हो गए।Yaar jadugar Book in Hindi
  • योग एक आशावादी दैहिक क्रिया थी। योग करते हुए ही अल्पायु मे भी मरा हुआ व्यक्ति समाज मे सकारात्मक सोच तथा अनुशासित जीवन पद्धति को जीने वाला आध्यात्मिक योगैया के तौर पर याद किया जाता था।
  • चौकीदार मतलब गावं देहात मे पुलिस प्रशासन की सबसे विश्वसनीय आँख। ये अलग बात थी कि भारतीय व्यवस्था की ये आँख हमेशा फूटी हुई रही।Yaar jadugar Book in Hindi
  • भागवत हाजरा ने आज तक अपने साइकिल मे ताला नहीं लगाया था। उसका कहना था कि  किसी चोर की माँ ने इतना अभागा बेटा जन्मा ही नहीं होगा जो चौकीदार भागवत हाजरा की साइकिल चुराकर अपनी बर्बादी को न्योता दे।
  • गावं-कस्बों मे बात करते वक्त कई बार लिहाज और संकोच का लेवल इतना है हो जाता है कि छोटी सी बात को उलट कर कहना पड़ता है। इसमे करता अपनी बात दूसरे करता का इस्तेमाल करते हुए कहता है। हिन्दी व्याकरण मे इसे ही घुम्माफेरि अलंकार कहते हैं।Yaar jadugar Book in Hindi
  • डेनियल बाबा का दरोगा को समझाना- भय! भय तो जीवन के साथ ही जाता है दारोगा। भय ना हो तो मनुष्य न जाने और कितना भयंकर होता। मृत्युलोक मे जो कुछ भी बचा है उसके पीछे भय है। हमने तो सुना है कि यहाँ प्रीत तक भय के बिना संभव नहीं। और यह भी क्या विचित्र विडंबना है कि मनुष्य को जब-जब लगा कि उसे भय नहीं लगता, वह कोई एक चीज नष्ट कर देता है।Yaar jadugar Book in Hindi
  • डर और भय मे अंतर होता है दारोगा। डर तो बाहरी उलझन है। लेकिन भय अंदर चेतना मे बैठी जटिल निर्बलता। मृत्यु भयभीत करती है, बाकी चीज़े केवल डराती है। डर को हराया जा सकता है, भय स्वयं विजेता है।Yaar jadugar Book in Hindi
  • नारायण सिंह के घर चोरी हो जाना- इधर सुबह-सुबह गावं दामुसिंघा मे अवध नारायण सिंह के यहाँ अलग ही मजरा था। अवध नारायण सिंह दुआर पर माथा धरे चौकी पर बैठे थे। घर के पीछे वाले हिस्से मे फूलचंद पिछवाड़े की दीवार पर खड़ा था। कौशल्या देवी अपने कमरे मे अलमारी का सारा सामान छितरकर बैठी थी। बेचैन अवध नारायण सिंह उठकर भीतर आए और आँगन को टाकर घर के पीछे की तरफ गए।Yaar jadugar Book in Hindi
  • जरा सोचिए कि इंसानों को जात-पात, धर्म-कर्म और लिंग-रंग में बांटकर दुनिया कितने गफलत मे रही होंगी, कितनी उलझ गई दुनिया कि इंसानों को अलग-2 खाँचो मे बाँट दिया गया!Yaar jadugar Book in Hindi
  • इस समाज में स्त्री पैदा थोड़े की जाती है। स्त्रियाँ तो गलती से हो जाती हैं। भला जिस समाज मे बेटियाँ मार दी जाती हों वहाँ उसे कोई दोबारा जिंदा क्यों करना चाहेगा! यहाँ लड़की का एक जीवन तो बर्दास्त नहीं, उसे दूसरा जीवन कौन देगा!
  • सनातनी परंपरा मे अमरता के वरदान प्राप्त सात चिरंजीवी महामानवों यथा राजा बलि, श्री परशुराम, श्री हनुमान, विभीषण, ॠषी व्यास, अश्वत्थामा और कृपाचार्यों मे भी सभी पुरुष ही थे, कोई स्त्री नहीं।Yaar jadugar Book in Hindi
  • साधारण मनुष्य तो स्वाभिक ही अपनी चित्त की दुर्बलताओं और मस्तिष्क की विकृतियों का दास है। ये प्रवृतियाँ उसे सहज ही आकर्षित कर ऐसा करने को प्रेरित करती ही हैं। लेकिन मानव को चाहिए कि अपनी नैतिकता से प्रेरित होकर उसे नियंत्रित करे और अपने भीतर के तमस से लड़े।Yaar jadugar Book in Hindi
  • डेनियल बाबा का एसपी से वार्ता- मैंने तुम्हारे ही दारोगा से सुना था कि पैसे में बहुत गर्मी होती है। जब भी मुझे ठंड लगती है तो इसे जलाकर ताप लेता हूँ।
  • डेनियल का सच- डेनियल की कोठी मे रहने वाला वो अंग्रेज की तरह दिखता बूढ़ा जो अब यमराज के सामने एक युवा के रूप मे खड़ा था, वो वास्तव मे कोई मानव नहीं बल्कि यमलोकाधिपती का पुत्र ‘कतिला’ था।
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कोट्स Yaar jadugar Book in Hindi

  • चुगली और गप्प की सबसे बड़ी प्रेरणा है जिज्ञासा। एक चुगलखोर इतना जिज्ञासु होता है जितना न्यूटन या गैलिलियों भी नहीं।
  • किसी भी माँ के लिए उसका बनाया खाना देवी अन्नपूर्णा भी ग्रहण करें तो छोटी-सी बात है, माँ के हाथों बने खाने की सिद्धि तो उसके बच्चों के ग्रहण करने से ही होती है।
  • ये भी क्या अजब-गजब बात थी कि मूंछ स्त्रीलिंग है और पुरुष उसका प्रदर्शन कर मर्दानगी दिखाता है ।
  • जहां बुनियादी सुविधाएं स्वप्न सरीखे हो जाए वहाँ चमत्कार से ही आस रहती है। और यह देश चमत्कारों का ही था।
  • मानव अपने-2 कर्मों का चलता-फिरता स्वर्ग-नरक दोनों है। मनुष्य को इसे भोगने कहीं जाना नहीं होता बल्कि इसे भोगकर जाना होता है।
  • पैसे मे पृथ्वी से ज़्यादा गुरुत्वाकर्षण और अप्सरा से ज़्यादा आकर्षण होता है ।
  • गावं-देहात के लोग हड़बड़ाते भी हैं तो बड़े इत्मीनान से, चलने की बात भी बैठते हुए कहते हैं।
  • आदमी जब अपने भीतर एक चोर लिए चलता है तो उसे अंदर-बाहर दोनों के शोर से डर लगता है।
  • पैसा और ज़बान, क्रोध से उबरकर शांत हो जाने के बाद ही खर्च करने वाली चीज है।
  • जितना सच जन्म लेना है, उतना सच मृत्यु भी है। और जो दुनिया से चला गया है, वह चला गया।
  • एक मनुष्य का एक ही जीवन उसे अपने ध्येय की पूर्ति का अवसर देते हुए सम्पूर्ण बनाता है।
  • ईश्वर और मनुष्य दोनों प्रकृति की अभिव्यक्तियाँ हैं। जिस मनुष्य मे जितना तप-बल-सत, नैतिकता और पवित्रता होंगी उसका ईश्वर उतना ही शक्तिशाली और प्रभावी होगा।
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पात्रों का चरित्र-चित्रण Yaar jadugar Book in Hindi

अवध नारायण सिंह- अवध नारायण सिंह दामुसिंघा गावं के एक बड़े जमींदार है। जो पैसे के बल पर 35 साल के मरे हुए अपने बेटे को जीवित करा लेते हैं। जिसका उन्हे बाद मे त्याग भी करना पड़ता है।   

जोगी सिंह- जोगी सिंह एक दारोगा हैं। जिनके एरिया मे दामुसिंघा गावं  और डेनियल की कोठी भी आती है। दारोगा पैसे का बहुत भूखा है, जो लोगों से पैसे लेकर उनके मरे हुए परिजन को डेनियल की मदद से पुनः जीवित कराता है। लेकिन दारोगा दिल का निर्मल है। क्योंकि जब भागवत हाजरा कहा जाता है कि उन सभी चार सिपाहीयों को वापस मार कर फेक दे, या ज़मीन मे दफ़न कर दे तो दारोगा ऐसा नहीं करता। 

फूलचंद पासी- फुलचंद पासी दामुसिंघा गावं का एक तुच्छ विरदारी का निवासी है। जिसके पत्नी और बच्चे की एक एक्सीडेंट मे मृत्यु हो चुकी है।  और अपनी जीविका चलाने के लिए अवध नारायण सिंह के यहाँ मजदूरी करता है। फुलचंद गरीब तो है पर एक ईमानदार भी है। अवध नारायण सिंह के याहन से चोरी करने करने के बाद उन पैसों से उसके बेटे को जीवित नहीं किया जा सकता तो पुनः पैसे को लौटा देता है।

डेनियल बाबा- डेनियल बाबा कोई और नहीं बल्कि यमराज का लड़का कतीला और धर्मराज युधिष्ठिर का चचेरा भाई है। जो अपने चचेरे भाई की तरह ख्याति पाने के लिए पृथ्वी को प्रस्थान कर डेनियल की कोठी मे अपना डेरा जमाया है। और मारे हुए लोगों को जीवित करता है। 

FAQ Yaar jadugar Book in Hindi

Q: दरोगा डेनियल बाबा के संपर्क मे कैसे आया?

Ans: पूरे कहानी मे इसका कोई वर्णन तो नहीं है लेकिन यमराज द्वारा अपने बेटे को बताए जाने पर ऐसा लगता है कि दारोगा जोगी सिंह और कोई नहीं देवलोक से भागा हुआ एक देवपुत्र है, जो धन की लालच मे पृथ्वी को चला आया।

Q:  याद जादूगर क्या फिक्शन किताब है?

Ans: हा! बिल्कुल।

डाउनलोड करने के निर्देश :- इस किताब को डाउनलोड करने के लिए प्रिन्ट बटन पर क्लिक करे और फिर destination के सामने वाले option पर save as pdf करे। और save कर ले। अब यह पेज डाउनलोड करने के लिए तैयार है।

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3 Comments

  1. बहुत खूब , ये पुस्तक पढ़ने से छूटी हुई थी , जल्द ही शुरू करते हैं ।
    इतनी बेहतरीन समीक्षा के लिए नमन

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