1.Summary and Review of Deigning density in hindi book by Daaji “

Summary and Review of Deigning density in hindi book by Daaji

दाजी नाम से विख्यात कमलेश पटेल ने Density Deigning क्या है? कैसे करना चाहिए, और इसके साधारण तरीकों के बारे मे बताया है। जो मानव को अपने आंतरिक विकास के साथ आप अपनी बाहरी संसार की रचना करने के बारे मे काम करता है।

Book Review of Deigning density(नियति का निर्माण) by Daaji-

दाजी नाम से विख्यात कमलेश डी. पटेल ने मानव को अपने आंतरिक विकास के साथ आप अपनी बाहरी संसार की रचना करने के बारे मे बताया है। जिसके लिए इंसान इधर-उधर भागता-फिरता है और परेशान होता है।  उन्होंने बड़े ही सरलता से उन सवालों के जवाब दिए हैं जो प्रचिनकाल से इंसान को परेशान करते आए हैं।

दुनिया के महान से महान दार्शनिक सदियों से यही सवाल पूछते आ रहे हैं। इस किताब के माध्यम से दाजी ने सभी लोगों के सवालों को अपने जवाब और सुझाव को बड़े ही विनम्रता से बताया है। और इनके उतने ही सहज और व्यावहारिक समाधान पेश किये हैं। हाल ही मे उन्होंने अपनी पहली पुस्तक “द हार्टफूलनेस वे” मे जिस आध्यात्मिक यात्रा से हमे रू-ब-रू कराया था।

भारतीय साहित्यकारों ने बहुत सारे शास्त्रों का, उपन्यास, कविताओं, यात्रा-वृतांत की रचना की है, जो उस समय के घटनाओं को लोगों से अवगत कराने का काम करती थी। बात करे मानव जीवन को अपने सांसारिक जीवन मे रहते हुए उन्हे सुसज्जित और सजग बनाने की तो ऐसी किताबों का नाम बहुत कम ही आता है। अगर शास्त्र की किताबों को छोड़ दे तो। क्योंकि लोग उन्हे ऐसा मानते हैं कि ऐसी किताबों उनके ऊपर की चीज है।

Deigning density उसी के अगले चरण मे बाते करती हैं। इसमे उन्होंने बताया है कि कैसे हार्टफूलनेस अभ्यासों के माध्यम से हम अपनी जीवन शैली मे सुधार ला सकते हैं। फिर वह नियति इस ज़िंदगी की हो या इसके बाद की।

Summary of Deigning density(नियति का निर्माण) by Daaji

स्वामी विवेका नन्द ने मानव कल्याण के लिए कुछ किताबें लिखी पर उन सभी लोगों के पास पहुच नहीं सकी, जिसकी उन्हे जरूरत थी। लेकिन अभी “दाजी” कमलेश पटेल ने अपने पूर्व किताब “द हार्टफुलनेस वे” के माध्यम से आध्यात्मिक के तरफ बढ़ते एक कदम हो सकता है। जिसे पढ़ने के बाद आप अपने जीवन मे उन सभी बदलाओं को ला सकते हैं, जिन्हे आप लाना चाहते हैं। चाहे वो आप छात्र हो, कर्मचारी हो या एक साधारण सदस्य। दाजी ने अपने किताब ”Deigning density” के कुछ सिद्धांत के बारे मे बताया है, जिसे हम क्रम वाइज जानना पसंद करेगे।

1-नियति का पहला सिद्धांत यह है कि हम इसे केवल वर्तमान मे ही बदल सकते हैं।

2- नियति का दूसरा सिद्धांत यह है कि अपनी नियति का निर्माण हम अपने दिन-प्रतिदिन के विचारों द्वारा ही कर सकते हैं। जैसे अपनी इच्छाओं के द्वारा, किसी के प्रति आकर्षण या विकर्षण के द्वारा तथा अपनी पसंद और नापसंद द्वारा।

3- तीसरा सिद्धांत यह है कि अपनी नियति के निर्माण के लिए हमे अपने मन पर कार्य करने की जरूरत है और इसके लिए हमे ध्यान का कोई अभ्यास करना होगा।

4- अंतिम सिद्धांत यह है कि जो हमें इस पुस्तक मे मिलता है वो यह यह है कि हम स्वयं से आरंभ करते हैं और फिर उसका घेरा बढ़ाते हुए दूसरों को शामिल करते जाते हैं। एक दिन ऐसा जरूर आएगा जब हम सब मिलकर मानवता की वर्तमान दिशा को बदल पाने मे सक्षम होंगे।    

कुछ अच्छे और महत्वपूर्ण अंश-

  • वह प्रत्येक वस्तु जिसमे कोई गुण हो, उसका बखान किया जा सकता है। और उसे परिभाषित भी किया जा सकता है। हालांकि गुणों से भरे इस संसार मे ईश्वर हर वस्तु मे मौजूद है। परंतु वास्तव मे ईश्वर के वास का इलाका तो अनंत है और अनंत को परिभाषित नहीं किया जा सकता। और भी बहुत से शब्द हैं, जो इसी सिद्धांत के लिए प्रयोग किये जा सकते हैं, स्रोत, सृष्टिकर्ता, परम, सम्पूर्ण, मालिक और दिव्यता।
  • कुछ ऐसे मूलभू सिद्धांत हैं जो नियति के इस विषय को बहुत ही व्यवहारिक तरीके से समझने मे मदद करते हैं।
  • ऐसा नहीं है कि ध्यान आपको सबकुछ दे देगा, परंतु अच्छी तरह से किया गया ध्यान एक हालात पैदा करता है और वह हालात आपको बदल देगी।
  • प्राणाहुति हमारी ऊर्जा  क्षेत्र की आंतरिक जटिलताओं या गाँठो को खोलती है ताकि आध्यात्मिक केंद्र या चक्र साफ होकर प्रकाशित हो सके। यह स्रोत तक की हमारी यात्रा मे आने वाली बाधाओं को हटाती है और ध्यान को सही अर्थ मे गतिशील बनाती है। प्राणाहुति बहूद्देशीय है। इसके बिना हर्टफूलनेस ध्यान सत्र संभव नहीं है।  
  •  ध्यान के तुरंत बाद अपना ध्यान बाहर की ओर ले जाने का प्रयास न करे।
  • अपनी वर्तमान आंतरिक स्थिति के अनुरूप समायोजन करे, इसे ग्रहण करने और गहन करने का प्रयास करे।
  • हमारा दिल एक बैरोमीटर की तरह है, यह समझने के लिए कि हम प्रत्येक चीज के बारे मे और स्वयं के प्रति भी कैसा महसूस करते हैं। हम अपने विचारों, भावनाओं और व्यवहार के बारे मे कैसा महसूस करते हैं और जीवन मे चुने गये विकल्पों के बारे कैसा महसूस करते हैं। यदि हम खुश हैं तब दिल से कुछ नहीं सुनेगे। जब हम सही तरीके से चुनाव करते हैं तो हृदय हमारे विचाराधीन निर्णय के प्रति बस एक मौन साक्षी बना रहता है।
  • रात्री मे सोने के समय अपने हृदय मे ईश्वरीय उपस्थिति को महसूस करे और जो कुछ भी अअपने गलत किया है, चाहे वह अनजाने मे ही हुआ हो, उसके लिए पश्चाताप करे। इसमे कोई दोषारोपण नहीं है। अपने हृदय की गहराई मे डूबकर प्रार्थनापूर्वक उसी गलती को दोबारा न करने का संकल्प ले। आप महसूस करेंगे कि जैसे एक बोझ हट गया है।
  • जब आप स्वयं को क्रोधित महसूस करे, अपना दायाँ नासिका छिद्र अंगूठे से बंद करे और अपने बाये नासिका छिद्र से धीमी, गहरी सांस ले। गहराई से सांस लेते हुए पेट तक खिचें और हर बार पूरी सांस लें। बाये नासिका छिद्र से आठ से दस बार इसी प्रकार सांस लेना जारी रखे।

कोट्स

  • किसी भी आध्यात्मिक अभ्यास का उद्देश्य चेतना का विस्तार करना है।
  • सदैव अपने गाइड से अपने हृदय द्वारा जुड़े रहे।
  • उस दशा के लिए तैयारी करे जो आगे आने वाली है। इसके लिए इंतजार करे। इसका अनुमान लगाए और इसके लिए तत्पर रहे।
  • सदैव अपने चारों ओर के वातावरण के प्रति सतर्क रहे। सोचते रहे कि आपको इनमे क्या करना चाहिए।
  • अपने दिल की सुने।
  • अपने हर कार्य मे श्रेष्ठ बने।
  • समय का सदुपयोग करे।
  • विनम्रता और सादगी विकसित करे।
  • सच्चे और स्वाभाविक बने।
  • प्रेम से बोले और प्रेम से भोजन करे।

FAQ

1-  क्या ईश्वर को परिभाषित किया जा सकता है?

 नहीं! वह प्रत्येक वस्तु जिसमे कोई गुण हो, उसका बखान किया जा सकता है। और उसे परिभाषित भी किया जा सकता है। हालांकि गुणों से भरे इस संसार मे ईश्वर हर वस्तु मे मौजूद है। परंतु वास्तव मे ईश्वर के वास का इलाका तो अनंत है और अनंत को परिभाषित नहीं किया जा सकता। और भी बहुत से शब्द हैं, जो इसी सिद्धांत के लिए प्रयोग किये जा सकते हैं, स्रोत, सृष्टिकर्ता, परम, सम्पूर्ण, मालिक और दिव्यता।

2- नियति क्या है?

   परिस्थितियाँ चाहे कैसी भी हो, खुद को खुश रखने के लिए ठीक से प्रशिक्षित कर लेना ही नियति है।

3- नियति का मतलब क्या है?

  हर तरह की पृष्ठभूमि और संस्कृतियों के लोगों से प्राप्त सबसे आम उत्तर तो बस यही है- खुशी, संतोष और प्रेम।

4- जीवन का मतलब क्या है?

जीवन का मतलब है क्रमिक विकास। प्रत्येक जीवन किसी न किसी प्रकार का क्रमिक विकास है। यह बुद्धिमत्ता, कौशल और मनोभावों(अभिवृत्तियों) के विकास के रूप मे हो सकता है। आविष्कार और खोज भी क्रमिक विकास का उदाहरण हैं। यहाँ तक कि असफलताओं और संघर्षों से भरा जीवन भी हमे बहुत कुछ सिखाता है और भावी विकास की ओर ले जाता है।

5- मानसिक अवसाद क्या है?

 आज के संसार का सबसे बड़ा बीमारी है। अप्रेल, 2017 मे विश्व स्वास्थ्य संगठन ने घोसणा की थी कि आजके समय करीब 30 करोड़ लोग मानसिक अवसाद से ग्रसित ठे। जिसका मतलब है कि बहुत बड़ी संख्या मे लोग नाखुश हैं। वे अपने जीवन मे और अधिक सकारात्मक और आनंदपूर्ण अद्देश्य चाहते हैं।

6- फ्री विल क्या है?

  हमारे तीन शरीर हैं: भौतिक या स्थूल शरीर, मन या सूक्ष्म शरीर और आत्मा या कारण शरीर। इनमे से प्रत्येक के लिए एक भिन्न तरीका अपनाए जाने की जरूरत है।

  • सससे पहले भौतिक शरीर को ले। हममे से कुछ बनावट मे छोटे और गठीले हैं जबकि दूसरे कुछ लंबे और दुबले-पतले। हम एक से दूसरे मे नहीं बदल सकते, चाहे कुछ भी क्यों ना हो जाए। हम अपने शरीर को पौष्टिक भोजन, नियमित व्यायाम, अच्छी साफ-सफाई, पर्याप्त नींद और प्राकृतिक के अनुरूप जीकर दुरुस्त रख सकते हैं और इसे अधिकतम स्तर तक ले जा सकते हैं। परंतु अपनी शारीरिक संरचना या आनुवांशिकी को बदलने की संभावना सीमित है।
  • इसके बाद आत्मा को लेते हैं, जिसे कारण शरीर भी कहा जाता है क्योंकि यह हमारे अस्तित्व का कारण है। इसके बारे मे दो मत है। एक मत कहता है कि आत्मा पहले से ही पूर्ण और अपरिवर्तित प्रकृति है। और दूसरा मत के ये कहना है कि आत्मा का भी एक उद्देश्य है और वह है विकसित होना। दो ही स्थिति मे आत्मा का विकास कोई ऐसी चीज़ है जिसे हम नियंत्रित नहीं कर सकते। आत्मा के अस्तित्व का पोषण करके हम कारण शरीर का पोषण करते हैं।
  • तीसरा शरीर शेष बचता है जिसे हम मन या सूक्ष्म शरीर के रूप मे जानते हैं जो हृदय और मन की ऊर्जा का क्षेत्र है। जहां वास्तव मे सबकुछ बदल सकता है। हम विचारों का नियमन करने के लिए खुद को प्रशिक्षित करते हैं व अपने स्वनिर्मित साँचे और भी, इच्छाओं और भावनात्मक प्रतिक्रियाओं पर कार्य कर सकते हैं। हम अपनी निर्णय लेने की क्षमता, हृदय की उदारता, अपने दृष्टिकोण, अपने संकल्प की ताकत और प्रेम करने की अपनी क्षमता को विकसित कर सकते हैं। यह वह मुख्य भाग है जिसे हम अपनी नियति के निर्माण हेतु परिष्कृत करते हैं।

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