Rule of Art of War Book in Hindi by Sun tzu

13 Most Effective Rule of Art of War Book in Hindi by Sun tzu pdf download

13 Most Effective Rule of Art of War Book in Hindi by Sun tzu pdf download. एक ऐसा किताब जिसे 500 ई. सा. पूर्व लिखा गया और उसके बाद उस किताब की मदद से बड़े से बसे महान रणनीतिकार और योद्धा अपनी फायदा के लिए आज तक उसके नक्शे कदम पर चलते आ रहे हैं।

Review of Art of War Book in Hindi by Sun tzu

“आर्ट ऑफ वार” चाइनीज युद्धा सुन त्ज़ू द्वारा 500-550 ईसा पूर्व लिखा गया एक शक्तिशाली लेख है। जिसे उस समय के हालात में सिर्फ और सिर्फ युद्ध को मद्देनज़र रखते हुए लिखा गया और आज फिंगरप्रिंट पब्लिकेशन के माध्यम से एम ए समीर द्वारा इसे हिन्दी में अनुवाद किया गया है, ताकि आज के समय के लोगों को उस कला का ज्ञात हो सकें।

इसमें कोई दोमत नहीं कि यह किताब कोई मामूली नहीं है। जब आप इस किताब को पढ़ेंगे तो आपके सामने आज के समय में चल रहे रसिया और यूक्रेन के युद्ध की छवि आपके आँखों के सामने आती जाएगी, और आप उससे इस किताब में दिए गए शक्तिशाली नियम को मिलाते जाएंगे कि यूक्रेन कौन सी गलती कर रहा है, जो उसे नहीं करना चाहिए था। और रसिया कौन सी गलती कर रहा है, जो उसे नहीं करना चाहिए था।

किसी भी देश के लिए एक कड़वी सच्चाई है, जिसका सामना आज नहीं तो कल होना ही है। बहुर सारे देश इसका सामना कर चुके हैं और आने वाले दिनों में भी करने वाले हैं। जिसमें भारत भी पीछे नहीं है। इससे जीवन मृत्यु का निर्धारण होता है। यह एक ऐसा मार्ग है, जहां या तो सुरक्षा है या फिर विनाश। अतः यह एक ऐसा गहनतम विषय है, जिसकी किसी भी कारणवश उपेक्षा नहीं की जा सकती है।

युद्ध की अगुवाई करने वाला एक जनरल, अगर इस किताब में दिए गए उन सभी नियमों को ईमानदारी के साथ अपने सनिकों को लेकर अपने विरोधी के प्रति निभाता है, निश्चित ही उसकी जीत होंगी।  इस बात से ही साबित होता है कि सुन त्ज़ू कितने बड़े और होशियार और चालाक योद्धा थे।

13 Most Effective Rule of Art of War Book in Hindi

सुन त्ज़ू द्वारा लिखी गई आर्ट ऑफ वार के तेरह नियम

योजना बनाना-

  • दुश्मन को लुभाने के लिए उसे लालच दें। दुश्मन के इलाके में अव्यवस्था फैलाए और फिर मौका मिलते ही उसे कुचल डालें।
  • यदि वह सभी मोर्चों पर सुरक्षित है, तो उसके लिए तैयार रहें। यदि वह अधिक शक्तिशाली है, तो उससे बचे।
  • यदि आपका प्रतिद्वंदी क्रोधी स्वभाव का है, तो उसे उत्तेजित करने का प्रयास न करे। कमजोर होने का दिखावा करें, ताकि वह घमंडी हो जाए।
  • अगर वह आराम कर रहा है तो उसे आराम न करने दे।
  • उस पर हमला करों, जब वह मुस्तैद न हो और वहाँ प्रकट हो जाओ, जहां आपकी उम्मीद न हो।
  • जीत में अग्रणी भूमिका निभाने वाले इन सैन्य उपकरणों को गुप्त रखना चाहिए।

युद्ध की तैयारी-

  • जब आप वास्तविक लड़ाई में संलग्न होते हैं और जीत मिलने में देर होती है, तो सैनिकों के हथियार सुस्त हो जाएंगे और उनका जोश ठंडा पड़ जाएगा। यदि आप एक शहर की घेराबंदी करते हैं, तो इससे आप अपनी ताकत को समाप्त कर देंगे।
  • फिर भी यदि अभीयान अधिक लंबा चलता है, तो ऐसी स्थिति में राज्य के संसाधन युद्ध का दबाव झेलने की क्षमता क्षीण हो जाती है।
  • जब आपके हथियार की धार धीमी हो जाए, आपकी ताकत समाप्त हो जाए, आपका खजाना खर्च हो जाए तो आपके आसपास के लोग आपकी मजबूरी का लाभ उठाने के लिए तैयार हो जाएंगे। फिर किसी भी चतुर व्यक्ति के लिए उन परिणामों को टालना मुमकिन नहीं होगा।
  • हालाँकि हमने युद्ध में मूर्खतापूर्ण जल्दबाजी के बारे में सुना है, लेकिन इस प्रकार लंबे-विलंब समय तक युद्ध में व्यस्त रहना उचित नहीं है।
  • लंबे समय तक युद्ध में लाभान्वित होने वाले देश का कोई उदाहरण नहीं है।

छलपूर्वक आक्रमण-

  • दुश्मन के देश को पूरी तरह से अपने अधिकार में लेना व्यवहारिक युद्ध की कला का जितना अच्छा उदाहरण है, उतना अच्छा उस देश को चकनाचूर करना और उसे नष्ट करना नहीं है । इसलिए दुश्मन की पूरी सेना, रेजिमेंट, टुकड़ी या किसी कंपनी को तबाह किए बिना पकड़ना उसे नष्ट करने की तुलना में ज्यादा बेहतर है।
  • इसलिए अपनी सभी लड़ाई में लड़ना और जीतना सर्वोच्च उत्कृष्टता नहीं है; सर्वोच्च उत्कृष्टता तो वह है कि जब दुश्मन को बिना प्रतिरोध के तोड़ दिया जाए।
  • इस प्रकार श्रेष्ठ नेतृत्व है कि दुश्मन की परियोजनाओं को पूरी तरह समझना; दूसरी श्रेष्टता दुश्मन को एकत्र होने से रोकना है; इस क्रम में अगली श्रेष्ठता युद्ध-क्षेत्र में दुश्मन की सेना पर हमला करना है और सबसे खराब नीति दीवारों वाले शहरों की घेराबंदी करना है।
  • नियम यह है कि दीवार वाले शहरों को घेरा करना ठीक नहीं है।  अगर इससे बचना मुमकिन हो तो बचा जाना चाहिए।  इस काम के लिए सुरक्षात्मक ढाल बनाना, गतिमान शरणस्थलों और युद्ध के विभिन्न उपकरणों की तैयारी में पूरे 3 महीने लगेंगे और किले के बाहर दीवारों के सहारे टीले बनाने में 3 महीने और लगेंगे ।
  • अपने आवेग को अनियंत्रित करने में असमर्थ जनरल जब अपने सैनिकों को आक्रमण करने का आदेश देगा तो वह परिणामस्वरूप उसकी एक तिहाई सेना मृत्यु के मुख में समा जाएगी, जबकि नगर अभी भी अधिकार-क्षेत्र से बाहर ही होगा। इस तरह की घेराबंदी के विनाशकारी प्रभाव ही होते हैं ।
  • इसलिए कुशल नेता बिना किसी लड़ाई के ही दुश्मन के सैनिकों को अपने अधीन कर लेता है; वह उनके शहरों की घेराबंदी किए बिना उन्हें अपने अधिकार में ले लेता है; वह बिना कोई लंबी लड़ाई लड़े ही राज्य को उखाड़ सकता है।
  • अपनी सेना को क्षति से बचाने के साथ-साथ वह साम्राज्य के विवाद का समापन करने में सफल रहेगा और इस प्रकार एक सैनिक को खोए बिना वह जीत का स्वाद चख लेता है।  यह छलपूर्वक हमला करने की विधि है।

कुशल प्रबंधन-

  • अच्छे सैनिक पहले खुद को हार की संभावना से परे रखते हैं और फिर दुश्मन को हराने के अवसर की प्रतीक्षा करते हैं।
  • हार के खिलाफ खुद को सुरक्षित करना हमारे अपने हाथों में है, लेकिन दुश्मन को हराने का अवसर को दुश्मन द्वारा प्रदान किया जाता है।
  • इस प्रकार अच्छा सेनानी हार के खिलाफ खुद को सुरक्षित करने में सक्षम होता है, लेकिन दुश्मन को हराने के लिए कुछ निश्चित नहीं कर सकता ।
  • हार के खिलाफ सुरक्षा का मतलब रक्षात्मक रणनीति है; दुश्मन को हराने की क्षमता का मतलब है आक्रामक होना ।
  • रक्षात्मक होना अपर्याप्त शक्ति को इंगित करता है; जबकि आक्रामक होना शक्ति का प्रदर्शन है।

शक्ति-

  • एक बड़ी सेना पर नियंत्रण का भी वही सिद्धांत है, जो कि कुछ लोगों पर नियंत्रण के सिद्धांत का है: यह केवल उनकी संख्या विभाजित करने का सवाल है।
  • आपकी आज्ञा के तहत एक बड़ी सेना के साथ लड़ना एक छोटी सेना से लड़ने से अलग है: यह केवल चिन्हों और संकेतों को स्थापित करने का सवाल है।
  • यह सुनिश्चित करने के लिए कि आपका पूरा मेजबान दुश्मन के हमले का खामियाजा भुगत सकता है और दुखी रहेगा-यह युद्धाभ्यास प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित होता है।
  • आपकी सेना का टक्कर ऐसी होनी चाहिए, जैसे कि अंडे की पत्थर से- यह कमजोर और मजबूत बिंदुओं के विज्ञान द्वारा प्रभावित होता है।
  • सभी लड़ाई में, प्रत्यक्ष पद्धति का उपयोग लड़ाई में शामिल होने के लिए किया जा सकता है लेकिन जीत हासिल करने के लिए अप्रत्यक्ष तरीकों की आवश्यकता होगी।

कमज़ोर और मज़बूत बिन्दु-

  • शत्रु की रणनीति को भेदकर कैसे जीत को उत्पन्न किया जा सकता है- यह वह है जो बड़ी संख्या में लोग नहीं समझ सकते हैं।
  • सभी लोग उस कार्य नीति को देख सकते हैं जिससे मैं जीतता हूं, लेकिन जिसे कोई भी नहीं देख सकता, वह है रणनीति, जो कि इसके लिए तैयार होती है।
  • उन रणनीतियों को दोबारा ना दोहराएं जिनसे आपको जीत हासिल हुई है, लेकिन रणनीतियों को विभिन्न प्रकार की परिस्थितियों द्वारा विनियमित किया जाना चाहिए।
  • सैन्य रणनीतियां पानी की तरह होती है; पानी अपने प्राकृतिक लक्षण के अनुसार उच्च स्थान से नीचे की ओर बहता है।
  • इसी तरह युद्ध में जो मजबूत है, उससे बचो और जो कमजोर है, उस पर वार करो।

युक्तिपूर्ण युद्ध-

  • युद्ध में, सेनापति अपनी शक्ति राज्य से प्राप्त करता है।
  • सेना को एकत्र करके और उस सेना पर केंद्रित होकर, उसे अपना शिविर छोड़ने से पहले अलग-अलग तत्वों में सामंजस्य करना चाहिए
  • उसके बाद युक्तिपूर्ण युद्ध आता है, जिससे अधिक कठिन कुछ भी नहीं है।  युक्तिपूर्ण युद्ध की कठिनाई में कुटिल को प्रत्यक्ष में बदल दिया जाता है और दुर्भाग्य को लाभ में।
  • इस प्रकार एक लंबा और घुमावदार लेना, फिर दुश्मन को रास्ते में भटकाना और फिर उसका पीछा करना, फिर दुश्मन से पहले लक्ष्य तक पहुंचना, यह सब विचलन की कलात्मकता को दिखाता है।
  • सेना के साथ युद्धाभ्यास करना लाभप्रद है; जबकि एक अनुशासनहीन सेना के साथ सबसे खतरनाक।

 कार्यनीति में विविधता-

  • युद्ध में जनरल अपनी संप्रभुता से अपने निर्देश प्राप्त करता है, अपनी सेना एकत्र करता है और अपनी सेनाओं पर ध्यान केंद्रित करता है।
  • जब देश में मुश्किल हो तो घेराबंदी ना करें। देश में जहां ऊंची सड़कें आपस में मिलती है, इसी तरह अपने सहयोगियों के साथ हाथ मिलाए। खतरनाक रूप से अलग-थलग स्थिति में न ठहरें। घिरी हुई स्थिति में अपने आपको चालाकी से बचाएं। हताश स्थिति में आपको लड़ना होगा।
  • ऐसे रास्ते हैं, जिनका पालन नहीं किया जाना चाहिए; ऐसी सेनाए हैं, जिन पर हमला नहीं किया जाना चाहिए; ऐसे कस्बे हैं, जिनकी घेराबंदी नहीं होनी चाहिए; ऐसी परिस्थितियाँ हैं, जिन पर तर्क ना करें; राज्य के ऐसे आदेश हैं, जिनका पालन नहीं किया जाना चाहिए।
  • वह जनरल, जो रणनीति के बदलाव के साथ होने वाले फायदों को अच्छी तरह से समझता है कि अपने सैनिकों को कैसे नियंत्रित करना है।
  • वह जनरल, जो इनको नहीं समझता है, वह देश के विन्यास से अच्छी तरह परिचित हो सकता है, फिर भी वह अपने ज्ञान का व्यवहारिक उपयोग नहीं कर सकेगा।

सेना का प्रयाण-

  • जब दुश्मन पास में होता है और शांत रहता है तो वह अपनी स्थिति की स्वाभाविक शक्ति पर भरोसा करता है।
  • जब वह अलग रहता है और लड़ाई को भड़काने की कोशिश करता  है तो वह उत्सुक होता है कि दूसरा पक्ष आगे बढ़े।
  • यदि उसकी जगह पर अतिक्रमण करना आसान है तो इसका मतलब है कि वह एक चारा पेश कर रहा है।
  • जब जंगल के पेड़ों के बीच गतिविधि होती है तो पता चलता है कि दुश्मन आगे बढ़ रहा है। मोटी घास की आड़ में होने वाली गतिविधियों का मतलब है कि दुश्मन हमें संदिग्ध बनाना चाहता है।
  • पक्षियों का उचाई तक उड़ना शत्रु के घात लगाकर बैठने का संकेत है। चौका देने वाले जानवरों से संकेत मिलता है कि अचानक होने वाला हमला ठीक सामने ही है।
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भूखंड-

  • सेना को एक मार्ग पर कब्जा कर लेना चाहिए और अगर मजबूत मोर्चाबंदी हुई है तो पीछा न करें; बल्कि केवल तभीआगे बढ़े, जब कमजोर मोर्चाबंदी हो।
  • उचाइयों के संबंध में अगर आप पहले से ही वहाँ मौजूद है तो आपको ऊंचे स्थानों पर कब्जा कर लेना चाहिए और वहा दुश्मन के आने का इंतजार करना चाहिए।
  • यदि शत्रु ने पहले ही उन पर कब्जा कर लिया है तो उसका पीछा न करें, बल्कि पीछे हटें और उसे दूर भगाने का प्रयास करें।
  • यदि आप दुश्मन से एक बड़ी दूरी पर स्थिति है और दोनों सेनाओं की ताकत बराबर है, तो लड़ाई को भड़काना आसान नहीं है और लड़ाई आपके लिए लाभकारी सिद्ध न होंगी।
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नौ परिस्थितियाँ-

  • युद्ध के लिए चालाकी आवश्यक है-दुश्मन के तैयार न होने का लाभ उठाएं, अप्रत्याशित मार्गो से अपना रास्ता बनाएं और उन बिंदुओं पर हमला करें, जिन पर वे जागरूक ना हो।
  • यह सिद्धांत हमलावर सेना को ध्यान में रखना चाहिए- जितना अधिक आप दुश्मन देश में प्रवेश करेंगे, उतना ही अधिक आपके सैनिकों की एकजुटता होगी और इस प्रकार दुश्मन आपको जीत नहीं पाएगा ।
  • उपजाऊ जमीन को पाने के लिए आधिकारिक प्रयास कीजिए, उससे आप की सेना को रसद-आपूर्ति होती रहे ।
  • अपने सैनिकों का ध्यान पूर्वक अध्ययन करें और अधिक दबाव ना डालें । अपनी उर्जा को एकाग्र करें और अपनी शक्ति को बढ़ाएं। अपनी सेना को लगातार आगे बढ़ाते रहें और बड़ी-बड़ी योजनाएं बनाएं।
  • अपने सैनिकों को उस स्थिति में छोड़ दें, जहां से कोई पलायन न कर सके और वे लड़ते हुए मृत्यु को प्राथमिकता दें। अगर वे मृत्यु का सामना करेंगे तो ऐसा कुछ भी नहीं है, जो वे प्राप्त नहीं कर सकते हैं । अधिकारी और सैनिक समान रूप से अपनी पूरी ताकत लगा दे।      
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आग द्वारा आक्रमण-

आग से हमला करते समय 5 संभावित परिस्थितियों के लिए तैयार रहना चाहिए ।

  • जब दुश्मन के शिविर के अंदर आग लग जाती है तो बिना किसी शोरगुल की प्रतिक्रिया करें।
  • अगर आग भड़क जाए, लेकिन दुश्मन के सैनिक शांत हो तो कुछ समय के लिए रुके और हमला न करें।
  • जब आग की लपटें ऊंचाई पर पहुंच गई हो, तो हमला कर दो, अगर यह संभव ना हो तो आप जहां हैं वहीं रहें।
  • अगर बाहर से आग द्वारा हमला करना संभव है तो उसे अंदर भड़काने के लिए इंतजार ना करें लेकिन अनुकूल समय पर अपना हमला करें।
  • जब आप आग लगा चुके हो तो उधर खड़े हो, जिधर से हवा आ रही हो। हमला कभी भी किसी ओट से न करें।
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गुप्तचरों का उपयोग-

  • स्थानीय गुप्तचर होने का मतलब है कि शहर के निवासियों की सेवाएं लेना।
  • आंतरिक गुप्तचर दुश्मन के वह अधिकारी होते हैं, जिनका उपयोग हमारे द्वारा किया जाता है।
  • परिवर्तीत गुप्त चर वह होते हैं, जो दुश्मन के गुप्तचरों को  नियंत्रित रखते हैं और उन्हें अपने उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल करते हैं।
  • झूठे जासूस वह होते हैं, जो धोखे से अपने उद्देश्यों को पूरा करने के लिए कुछ चीजें खुले तौर पर अंजाम देते हैं और हमारे गुप्तचरों को उनके बारे में जानने के लिए मना लेते हैं और फिर दुश्मन को रिपोर्ट देते हैं।
  • सक्रिय गुप्तचर वह होते हैं, जो दुश्मन के शिविर से  समाचार लाते हैं। 

सुन त्ज़ू एक संक्षिप्त परिचय-

मैने सुन त्ज़ू के इस संक्षिप्त परिचय को फिंगरप्रिन्ट द्वारा छापे गए कृति से लिया गया है।

सुन त्ज़ू पूर्वी एशिया के सबसे महत्वपूर्ण ऐतिहासिक लोगों में से एक हैं। वे एक सैन्य रणनीतिकार थे, जो प्राचीन चीन में रहते थे, पारंपरिक इतिहासकारों का मानना है कि उनका जीवनकाल 544 से 496 ईसा पूर्व हुआ था। सुन त्ज़ू का पैदाइशी नाम सुन वू था। यह एक प्रसिद्ध नाम है, जिसका मतलब है ‘मास्टर सुन’।  उन्हें अपनी कृति आर्ट आफ वार के लिए पूरी दुनिया भर में जाना जाता है। यह एक कालातीत कृति है और पूर्वी साहित्य में अपनी एक महत्वपूर्ण पहचान रखती है।

आर्ट ऑफ वार युद्ध और सैन्य रणनीति पर लिखा गया एक महत्वपूर्ण ग्रंथ है और नेपोलियन, माओ जेडॉग्ण,  फिदेल कास्त्रो, जोसेफ स्टालिन और जनरल डग्लस मैकार्थर ने इस महान ग्रंथ में उल्लिखित महत्वपूर्ण बिंदुओं को अनगिनत लड़ाई ऊपर संघर्षों में अपनी रणनीति का आधार बनाया है । चीनी सम्राटों और शासकों ने युद्ध की अवधि के दौरान इस ग्रंथ से मार्गदर्शन लिया है। सैन्य विज्ञान पर कोई अन्य पाठ इतना लोकप्रिय और व्यापक रूप से नहीं पढ़ा गया है, जितना कि आर्ट ऑफ वार को पढ़ा गया है। सुन त्ज़ू की इस उत्कृष्ट कृति के अनेक भाषाओं में अनुवाद हो चुके हैं और पिछली कुछ सदियों में इसकी लाखों प्रतियां बिक चुकी हैं।

FAQ-

Q: आर्ट ऑफ वार क्या है?

Ans:आर्ट ऑफ वार एक युद्ध करने के शक्तिशाली 13 नियम हैं, जिसे हर उस युद्ध के अगुवाई कर्ता को जाननी चाहिए।

Q: आर्ट ऑफ वार के लेखक कौन है?

Ans: आर्ट ऑफ वार के लेखक चाइनीज योद्धा सुन त्ज़ू हैं।

Q: आर्ट ऑफ वार को कब लिखा गया था?

Ans: सुन त्ज़ू से आर्ट ऑफ वार को 550 ईसा पूर्व लिखा था।

Q: आर्ट ऑफ वार का हिन्दी अनुवादक कौन है?

Ans: आर्ट ऑफ वार के हिन्दी अनुवादक एम ए समीर है, जिसे फिंगरप्रिंट पब्लिकेशन ने पब्लिश किया है।

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